जल संरक्षण

पर्यावरण के प्रति हम मनुष्य की कुछ जिम्मदरियाँ है। आज हर मनुष्य अपनी व्यस्त दिनचर्या में इतना डूब गया है कि पर्यावरण से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों को पीछे छोड़ चला है। इन्हीं में शामिल एक जिम्मदारी हमारी जल संरक्षण से जुड़ी है। “जल” से तो यूँ हम रोज लगभग सारे काम करते है

अपशिष्ट प्रबंध

अपशिष्ट प्रबंधन क्या है पहले हम यह , समझ लेते हैं की अपशिष्ट प्रबंधन क्या है। अपशिष्ट प्रबंध में अपशिष्ट को प्रबंधित करने से लेकर उसके अंतिम निपटान तक की गतिविधि और क्रियाओं को शामिल किया जाता है। इसमें कचड़े का संग्रह परिवहन उपचार और निपटान शामिल है।

हमारी उदासीनता को झकझोरता बढ़ता पर्यावरणीय असंतुलन

आज समूचा विश्व जल आपूर्ति की समस्या से ग्रसित है। ओर कही नहीं हमारे देश भारत की ही बात करें तो देश भर में आज की स्थिति में कई ऐसे शहर व गाँव है जहां के रहवासियों को पीने व रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति के लिए पानी की जुगत भिड़ाने में घण्टों की मेहनत …

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माझे composting चे प्रयोग

ओला कचरा , सुका कचरा वेगळा करा असा महानगरपालिकेचा फतवा आला आणि पाठोपाठ हिरव्या आणि पांढऱ्या डब्याचा ढीग येऊन पडला. (आता नीळा झालाय पांढऱ्या ऐवजी ).

जड़ों से जड़ों तक..

आमतौर पर हम प्रकृति को बचाने की बातें करते हैं। वातावरण को शुद्ध करने के उपाय सोचते हैं और साफ सफाई के नारे लगाते हुए शपथ लेते हैं, मगर मुट्ठी भर कार्य करने के बाद हम दूसरे कार्य और जीवनयापन के साधनों को जुटाने में यह सब बातें भूल जाते हैं।

वानिकी

वानिकी एक ऐसा शब्द है जिसका संबंध हम सभी से टूटता जा रहा हैं. आज के समय में वानिकी शब्द को पसंद तो सभी करते हैं लेकिन वानिकी को बहुत कम लोग अपना पाते हैं. देखा जाए तो वानिकी के बिना हमारा जीवन अधूरा हैं, यह भी कहा जा सकता है बिना वानिकी के हमारा …

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जैविक खेती को बढ़ावा दे किसान !

प्राचीन काल से ही भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर रही है। तभी कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा व माना भी जाता हैं। वर्तमान समय की बात करे तो इस समय कामगार लोगों की संख्या का 52 प्रतिशत से भी ज्यादा भाग कृषि या इससे संबन्धित क्षेत्रों में कार्यरत है।